देश के विकास के लिए इस्लामी पूंजी निवेश

इस्लामी वित्त दुनिया भर में एक मज़बूत विकल्प के रूप में पशिचम की वित्तीय मंदी के बाद उभर रहा है और इसकी वृद्धि दर 15 प्रतिशत से अधिक है। न केवल मुसिलम देश बलिक आधुनिक, सेक्युलर और व्यावसायिक देश जैसे बि्रटेन, फ्रांस, जापान सिंगापुर, हांगकांग इस्लामी वित्त और बैंकिंग के केन्द्र बन चुके हैं। यहां तक कि विष्व बैंक ने इस्लामी वित्त को एक प्राथमिक क्षेत्र ठहराया है।


बैंकों के राश्ट्रीयकरण के 40 वर्श बाद भी देश के 60 प्रतिशत लोग बैंकों और वित्तीय सुविधाओं से बहुत दूर हैं। केवल 5 प्रतिशत गांवां में बैंकों की षाखाएं मौजूद हैं। छोटे किसान और व्यापारी, असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाला आम आदमी वित्तीय सुविधाओं से वंचित है। सच्चर कमेटी रिपोर्ट ने मुसिलम बहुल क्षेत्र को नकारात्मक क्षेत्र ठहराया है, क्योंकि मुसलमान ब्याज के हराम होने के कारण बैंकों से दूर हैं। इस्लामी वित्त केवल मुसलमानों के लिए नहीं हैं बलिक इसमें ग़ैरमुसिलमों की भी बड़ी संख्या भाग लेती है। जैसे मलेशिया में 40 प्रतिशत निवेशक और 60 प्रतिशत उपभोक्ता ग़ैरमुसिलम ही हैं, जो इसी प्रकार बि्रटेन और केनिया में इनकी संख्या 20 प्रतिशत है।


डा. रघुराम राजन कमेटी, जो 2008 र्इ. में योजना आयाग की ओर से उच्च स्तरीय कमेटी बनी थी, उसने ब्याजरहित बैंकिंग प्रणाली को देश की बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने की सिफ़ारिश की थी। इसी प्रकार केरल सरकार के अलबरकह कमेटी और डा. सुब्रह्मणयम स्वामी के केस में केरल हार्इकोर्ट ने इस्लामी बैंकिंग के समर्थन के फ़ैसला दिया है। कुछ दिनों पहले आंध्र प्रदेश की सरकार ने ब्याजरहित क़ज़ो± को माइक्रोफाइनांस के द्वारा क़र्जे उपलब्ध करने की घोशणा की है।

हमारे देश को अपना आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए एक टि्रमिलियन अमेरिकी डालर की आवष्यकता है ताकि ताकि इसकी वार्शिक विकास दर 9 से 9ण्5 प्रतिशत हो सके यह राशि 12वीं पंचवर्शीय योजना में 11वीं पंचवर्शीय की तुलना में दोगुनी है। ''स्टेंडर्ड एंड पुअर्स जो बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की दर और वित्तीय वज़न को निर्धारित करती है। जिसमें अमेरिकी वित्तीय संस्थाओं और खुद एस.बी.आर्इ. के वज़न को कम ठहराया था। यह इसका एक हालिया दस्तावेज़ जो सिंगापुर से जारी हुआ, ''क्या इस्लामी वित्त एशिया महादेश के आधारभूत ढांचे की आवष्यकता को पूरा कर सकेगा? षीर्शक से परंपरागत पूंजी निवेश दुनिया भर में घाटे का शिकार है और एक बेहरतीन विकल्प की खोज में है। इस रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी वित्त एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।


इसी प्रकार विष्वविख्यात ज्ीम म्बवदवउपेज ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है कि खाड़ी के देश अपने व्यापार एवं पूंजी निवेश के लिए अमेरिका और यूरोप के बाज़ार के बजाय उभरते हुए मार्केट चीन और भारत की ओर देख रहे हैं। भारत को इसका भरपूर लाभ उठाने के लिए आवष्यक है। एक अनुमान के लिए अनुसार 1ण्5 ट्रीलियन अमेरिकी डालर का फंड मध्य पूर्व में घूम रहा है। जिसे अगले दस वशो± में चार गुना हो जाने का अनुमान है। हमारा देश जो बहुत तेज़ी से एक अन्तराश्ट्रीय वित्तीय शकित बन कर उभर रहा है, इसे 3 बिलियन अमेरिकी डालर की आवष्यकता है। ढांचागत विकास के लिए इस्लामी वित्त बहुत मुनासिब है। सुकूक (इस्लामी बांड) जो बड़े पैमान पर पूंजी निवेश का माध्यम न केवल इंडोनेशिया और मलेशिया में है, बलिक फ्रांस और जर्मनी में भी प्रयोग किया जा रहा है। भारत को उससे भी पूरा लाभ उठाने की ज़रूरत है।

हम देश की सरकार, वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक से भी अपील करते हैं कि वे वित्त और बैंकिंग के नियमों में उचित संषोधन करके इस देश में भी इस्लामी वित्त के लिए अवसर उपलब्ध करें, ताकि देश के सभी नागरिकों, विषेश रूप् से उपेक्षा का शिकार लोगों और अल्पसंख्यकों को इस देश के बहुमुखी विकास में भागीदारी मिले और इस्लामी बांड (सुकूक) के माध्यम से बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की उपलब्धता द्वारा देश के ढांचागत विकास में वृद्धि करके देश को विकास के मार्ग पर अग्रसर करें।

एच. अब्दुर रक़ीब
जनरल सेक्रेट्री
इंडियन सेन्टर फार इस्लामिक फाइनांस
नर्इ दिल्ली
ICIF

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